Breaking News

आस्था का ऐतिहासिक सफर: 1026 वर्ष बाद सोमनाथ का प्राचीन शिवलिंग निकला देश भ्रमण पर

Share This News

आसनसोल (ASANSOL):
पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित रवीन्द्र भवन के कॉफी हाउस में आर्ट ऑफ लिविंग के सदस्यों द्वारा एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जानकारी साझा की।

आर्ट ऑफ लिविंग के सदस्यों ने बताया कि देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले सोमनाथ मंदिर के खंडित, अद्भुत, चमत्कारी और आदि शिवलिंग को 1026 वर्षों के बाद देश भ्रमण पर निकाला गया है। इस यात्रा का उद्देश्य यह है कि देश की आम जनता इस पावन आदि शिवलिंग के दर्शन कर सके और इसके गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।

उन्होंने बताया कि इसी क्रम में आगामी 16 जनवरी को यह आदि शिवलिंग पश्चिम बंगाल के आसनसोल पहुँचेगा, जहाँ चंद्रचूड़ स्थित भगवान शिव मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु रखा जाएगा। इसके बाद शिवलिंग बंगाल के अन्य जिलों का भ्रमण करते हुए देश के विभिन्न राज्यों में ले जाया जाएगा।

आर्ट ऑफ लिविंग के सदस्यों ने कहा कि विश्व भ्रमण पूर्ण होने के बाद शिवलिंग की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी और पुनः इसे सोमनाथ मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इस विषय को लेकर श्री-श्री रवि शंकर जी, देश के प्रधानमंत्री तथा सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के निरंतर संपर्क में हैं और स्थापना को लेकर गंभीर चर्चाएं चल रही हैं।

उन्होंने 1026 वर्ष पूर्व की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। उस समय यह मान्यता थी कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग हवा में तैरता था, जिसका रहस्य मंदिर के मंडप में प्रयुक्त चुंबकीय सामग्री से जुड़ा हुआ था। इसी कारण आक्रमण के दौरान शिवलिंग के साथ-साथ मंडप को भी ध्वस्त कर दिया गया।

बताया गया कि मंदिर के पुजारी अग्निहोत्री परिवार खंडित शिवलिंग को लेकर दक्षिण भारत, तमिलनाडु पहुँचे और कांची के शंकराचार्य के निर्देशानुसार वर्षों तक गुप्त रूप से उसकी पूजा करते रहे। शंकराचार्य ने यह भी कहा था कि जब देश स्वतंत्र होगा और राम मंदिर की स्थापना होगी, तब यह शिवलिंग एक शंकर नामक संत को सौंपा जाएगा।

आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार, राम मंदिर की स्थापना के बाद शंकराचार्य के निर्देश पर अग्निहोत्री परिवार ने शिवलिंग के अवशेष श्री-श्री रवि शंकर जी को सौंप दिए, जिसके पश्चात अब इसे जन-जन के दर्शन हेतु देश भ्रमण पर निकाला गया है।

सोमनाथ महादेव को लेकर मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद्र देव ने स्वयं किया था। यह स्थान चंद्र दोष निवारण के लिए अत्यंत सिद्ध माना जाता है। श्रद्धालुओं की आस्था है कि सोमनाथ महादेव के दर्शन से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं।

मान्यता यह भी है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भालुका तीर्थ पर देह त्याग कर यहीं से वैकुण्ठ गमन किया था, जहाँ आज एक भव्य कृष्ण मंदिर स्थित है।

सोमनाथ महादेव का यह आदि शिवलिंग आज भी सनातन आस्था, इतिहास और दिव्यता का प्रतीक बना हुआ है।

Leave a comment