फाईलेरिया से ग्रसित रोगियों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए शिविर का आयोजन,दिव्यांगत्ता प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए की गई 49 रोगियों की अनुसंशा

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आयुष्मान आरोग्य मंदिर कनकनी में फाईलेरिया से ग्रसित रोगियों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए आज एक शिविर का आयोजन किया गया। कार्यकम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

शिविर में चिकित्सीय जाँच के पश्चात 49 फाईलेरिया रोगियों का दिव्यांगत्ता प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए अनुसंशा की गई। शिविर को सफल बनाने में सहिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके द्वारा विभिन्न गाँवों के फाईलेरिया रोगियों को शिविर में लाया गया।

इस अवसर पर सिविल सर्जन ने कहा कि फाईलेरिया गन्दे पानी में पनपने वाली एक सबसे अधिक आवादी वाले संक्रमित मादा क्युलेक्स मच्छर के काटने से अपंगता पैदा करने वाली द्वितीय सबसे बड़ी लाईलाज बीमारी है। इसकी वजह से हाथ, पांव (हाथीपांव) का फूलना और हाइड्रोसील होता है। वर्ष में एक बार डीईसी एवं अल्बेण्डाजोल दवा का एकल खुराक सेवन कराकर फाईलेरिया पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

उन्होंने कहा फाईलेरिया के रोगाणु अपने पूरे जीवन काल में करोड़ों माइक्रो फाईलेरिया रोगाणुओं को जन्म देते हैं। दवा सेवन के इस अभियान द्वारा माइक्रो फाईलेरिया को समुदाय में फैलने से रोका जा सकता हैं, जिससे मच्छरों द्वारा अन्य स्वस्थ्य व्यक्तियों को इसके संक्रमण से बचाया जा सकता है।

उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि कोई भी फाईलेरिया रोगी जो दिव्यांग है उन्हें प्रत्येक गुरुवार को सदर अस्पताल, धनबाद में आयोजित दिव्यांग बोर्ड में सम्मलित होकर अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत कराएं। जिससे सरकार द्वारा दी जाने वाली सारी सुविधाओं का लाभ उन्हें प्राप्त हो सके।

दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए चिकित्सीय दल में जिला वीबीडी पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार, धनबाद सदर के प्राभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनिता चौधरी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ हरेन्द्र कुमार, सर्जन डॉ जितेन्द्र कुमार चौधरी शामिल थे। वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला वीबीडी सलाहकार श्री रमेश कुमार सिंह, प्रखण्ड कार्यकम प्रबंधक श्री अभिजीत, एमटीएस श्री अमर चन्द्र मंडल, बीटीटी श्री मुक्ति रंजन दास, एमपीडब्लू श्री महावीर महतो व श्री गणेश कुमार, पीरामल स्वास्थ्य के मो. आबिद सरदार व श्री जयशंकर का सराहनीय योगदान रहा।

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