नमामि गंगे योजना के अंतर्गत ‘शून्य बजट प्राकृतिक खेती’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज, दिनांक 06/10/2026 को धनबाद में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें जिले के सभी प्रखंडों से 74 किसानों ने भाग लिया।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के प्रधान सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने किसानों को “शून्य बजट प्राकृतिक खेती” प्रणाली की जानकारी देते हुए प्रशिक्षण दिया। उन्होंने इसके चार प्रमुख घटकों—बीजामृत, जीवामृत, मल्चिंग एवं वाप्सा की उपयोगिता, प्रयोग की विधि और खेती में इनके महत्व के बारे में विस्तार से बताया।
जिला कृषि पदाधिकारी, धनबाद श्रीमती अंजना कुमारी ने कहा कि शून्य बजट प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक और महंगे बाहरी कृषि इनपुट के बिना फसल उत्पादन पर जोर दिया जाता है। इसमें कम पानी की खपत और देशी गाय आधारित कृषि पद्धति को अपनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इससे मिट्टी की उर्वरता व स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ खेती की लागत और कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिलेगी, जिससे किसानों की आय एवं मुनाफा बढ़ने की संभावना रहती है।
कार्यशाला के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी अपनी समस्याएं वैज्ञानिकों के समक्ष रखीं, जिनका डॉ. अनिल कुमार ने समाधान किया और आवश्यक सुझाव दिए।
इस अवसर पर नमामि गंगे के जिला परियोजना पदाधिकारी श्री राजू कुमार, भूमि संरक्षण पदाधिकारी श्री शिव कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी श्री अमितेश कुमार, LDM कार्यालय धनबाद के श्री रोशन आनंद, उप परियोजना निदेशक (आत्मा, धनबाद) श्री मोती लाल रजक, पौधा संरक्षण निरीक्षक श्री मनीष कुमार, केवीके के डॉ. आदर्श श्रीवास्तव, सभी प्रखंडों के BAOs, BTMs, ATMs सहित 74 किसान उपस्थित रहे।