उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि वे केवल निर्देशों का पालन करने वाले प्रशासक नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ज़मीन खुद तैयार करने वाले नेता हैं।
केंद्र और राज्य के बीच शक्ति-संतुलन को लेकर चल रही खींचतान में योगी लगातार यह दिखा रहे हैं कि जब उनकी बात नहीं मानी जाती, तो वे वैकल्पिक रास्ते निकालने से पीछे नहीं हटते।
पहले मामला अवनीश अवस्थी का रहा। मुख्यमंत्री चाहते थे कि उन्हें सेवा विस्तार मिले, लेकिन केंद्र से मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद योगी ने उन्हें सीधे अपना सलाहकार नियुक्त कर दिया, जिससे उनकी भूमिका, प्रभाव और सुविधाएं बरकरार रहीं।
इसके बाद मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए मनोज कुमार सिंह के लिए भी योगी ने सेवा विस्तार की मांग रखी, लेकिन केंद्र ने एक बार फिर हामी नहीं भरी। जवाब में योगी ने मनोज कुमार सिंह को राज्य योजना आयोग / स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन मिशन जैसा अहम और प्रभावशाली दायित्व सौंप दिया।
अब तीसरा और सबसे अहम नाम था—प्रशांत कुमार।
लंबे समय तक प्रदेश में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर और फिर डीजीपी रहे प्रशांत कुमार मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अफसरों में गिने जाते हैं। योगी चाहते थे कि उन्हें भी सेवा विस्तार मिले, लेकिन इस बार भी केंद्र सरकार ने सहमति नहीं दी।
यहीं से साफ हुआ कि योगी आदित्यनाथ अब पहले वाले योगी नहीं रहे। प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ उन्होंने राजनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी खुद को मजबूत किया है। वे उन अधिकारियों की एक ऐसी टीम तैयार कर रहे हैं जो लंबे समय तक उनके साथ खड़ी रहे।
इसी कड़ी में बड़ा संस्थागत बदलाव किया गया।
उच्च शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को मिलाकर एक नई और अत्यंत शक्तिशाली संस्था—उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग—का गठन किया गया। इसके नियमों में संशोधन कर अध्यक्ष पद को इतना प्रभावी बनाया गया कि यह भूमिका सत्ता-संतुलन में महत्वपूर्ण बन गई।
और इसी पद पर योगी आदित्यनाथ ने अपने विश्वासपात्र प्रशांत कुमार को नियुक्त कर दिया।
यह नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि केंद्र को दिया गया स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी है—
कि जहां दबाव बनाने की कोशिश होगी, वहां योगी और अधिक सख्ती और रचनात्मकता से जवाब देंगे।
उत्तर प्रदेश में अपने प्रभाव और नियंत्रण को कमजोर होने देने के मूड में मुख्यमंत्री बिल्कुल नहीं हैं, और वे यह भी संकेत दे चुके हैं कि लंबी राजनीतिक पारी के लिए वे हर जरूरी संरचना खुद खड़ी करेंगे।