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कार्तिक पूर्णिमा व गायत्री माता स्थापना दिवस पर गायत्री ज्ञान मंदिर सिंदरी में विविध आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित

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गायत्री ज्ञान मंदिर सिंदरी में कार्तिक पूर्णिमा व गायत्री माता स्थापना दिवस पर दिनभर अध्यात्मिक अनुष्ठानों की छटा बिखरी

धनबाद (DHANBAD): 5 नवंबर, बुधवार की पावन सुबह गायत्री ज्ञान मंदिर, सिंदरी का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। कार्तिक पूर्णिमा और गायत्री माता स्थापना दिवस के विशेष संगम ने मंदिर प्रांगण को भक्ति, साधना और संस्कृति के अद्भुत रंगों से सजाया। सूर्योदय के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया और देखते ही देखते पूरा प्रांगण भक्तिभाव से सराबोर हो उठा।

तीन कुण्डीय गायत्री महायज्ञ ने वातावरण किया पवित्र

सुबह 9 बजे से यज्ञशाला में तीन कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। आचार्यों के वैदिक मंत्रोच्चारण, हविष्य की सुगंध और यज्ञाग्नि की पवित्र आभा से पूरा परिसर आध्यात्मिक तेज से सम्पन्न दिखाई दिया। साधकों ने स्वच्छ मन, शांति और कल्याण की भावना से आहुतियाँ अर्पित कीं।
यज्ञ स्थल पर मौजूद हर साधक के चेहरे पर भक्ति और संतोष की अनोखी चमक थी। इस महायज्ञ में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज से आए भक्तों ने भी सहभागिता की।

सत्यनारायण भगवान की कथा ने दी धर्म, कर्तव्य और सद्भाव की प्रेरणा

महायज्ञ के पश्चात सत्यनारायण स्वामी की कथा का आयोजन हुआ। कथा वाचक ने भगवान सत्यनारायण की महामहिमा, उनके द्वारा प्रदत्त लोककल्याण के संदेश और सत्मार्ग पर चलने की प्रेरक कथाएँ सुनाईं। उपस्थित भक्तगण पूरी श्रद्धा से कथा श्रवण करते रहे। कथा के दौरान भक्ति गीतों और प्रसंगों ने वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना दिया।

महाप्रसाद वितरण में उमड़ा श्रद्धालुओं का स्नेह

कथा और यज्ञ के समापन के बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महाप्रसाद ग्रहण किया। पूरे परिसर में सामूहिकता और भाईचारे का उत्साहपूर्ण दृश्य दिखाई देता था। श्रृद्धालुओं की लंबी कतारें इस दिव्य आयोजन की सफलता और लोकप्रियता का प्रतीक थीं।

संध्या को दमका देव दीपावली का प्रकाश

संध्या होते ही मंदिर परिसर दीयों की ज्योति से आलोकित हो उठा। देव दीपावली के उपलक्ष्य में आयोजित दीपयज्ञ ने पूरे वातावरण को दिव्य, शांत और मनोहर बना दिया।
भक्तों ने दीप प्रज्वलित कर गायत्री माता और देवत्व के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि और दीपों की झिलमिलाहट ने मानो आध्यात्मिक सौंदर्य की एक नई परिभाषा गढ़ दी।

भक्ति, साधना और संस्कार— तीनों का सुंदर समागम

गायत्री ज्ञान मंदिर, सिंदरी में पूरे दिन चले आयोजन ने कार्तिक पूर्णिमा और गायत्री माता स्थापना दिवस को एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक पर्व बना दिया। यज्ञ, कथा, भजन और दीपोत्सव का यह सुन्दर संगम श्रद्धालुओं के मन में शांति, सकारात्मकता और दिव्यता की अमिट छाप छोड़ गया।

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