AI को आधार से जोड़ने पर हर नागरिक को मिल सकते हैं ट्यूटर, डॉक्टर और कृषि विशेषज्ञ: विनोद खोसला

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DESK: प्रख्यात वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला ने सुझाव दिया है कि आने वाले वर्षों में भारत के हर नागरिक तक एआई आधारित ट्यूटर, डॉक्टर और कृषि सलाहकार जैसी सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। उनका मानना है कि इन तकनीकी सेवाओं को देश के डिजिटल पहचान ढांचे ‘आधार’ से जोड़ा जा सकता है, जिससे इन्हें बड़े पैमाने पर लागू करना आसान होगा।

आधार और यूपीआई जैसी संरचना से जोड़ने का सुझाव

नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में बोलते हुए खोसला ने कहा कि शुरुआत में इन एआई सेवाओं के विकास और संचालन के लिए एक गैर-लाभकारी संस्था बनाई जा सकती है। बाद में इसे आधार प्रणाली के साथ एकीकृत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिस तरह आधार ने यूपीआई जैसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूती दी, उसी तरह पहचान-आधारित मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर एक-दो साल में देशभर में ये सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

एआई का लाभ समाज के निचले तबके तक

खोसला ने जोर देकर कहा कि एआई का उपयोग केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहकर समाज के निचले आर्थिक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। उनके अनुसार, जब एआई का फायदा आबादी के निचले 50 प्रतिशत हिस्से तक पहुंचेगा, तभी इसका असली परिवर्तनकारी प्रभाव दिखाई देगा।

शिक्षा में व्यक्तिगत ट्यूटर की भूमिका

शिक्षा क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एआई-आधारित पर्सनल ट्यूटर अब कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविकता बन चुके हैं और बड़ी संख्या में छात्र इनका उपयोग कर रहे हैं। ये सिस्टम छात्र की कमजोरियों को पहचानकर उसी अनुसार पाठ्य सामग्री तैयार कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे टूल्स सरकार के ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म को और प्रभावी बना सकते हैं, क्योंकि वे उपलब्ध कंटेंट को छात्र की जरूरत के मुताबिक व्यवस्थित कर सकते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में 24×7 सहायता

स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्होंने चौबीसों घंटे उपलब्ध एआई-आधारित प्राथमिक देखभाल प्रणाली का विचार रखा। यह प्रणाली कम लागत में पुरानी बीमारियों की निगरानी, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, फिजियोथेरेपी मार्गदर्शन और पोषण संबंधी सलाह जैसी सेवाएं दे सकती है।

किसानों के लिए डिजिटल कृषि विशेषज्ञ

कृषि क्षेत्र के लिए खोसला का मानना है कि एआई के जरिये हर किसान, खासकर छोटे जोत वाले किसानों, को उच्च स्तरीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह चौबीसों घंटे मिल सकती है। इससे खेती से जुड़े निर्णय अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बन सकते हैं।

खोसला के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्रों में एआई का बड़े पैमाने पर उपयोग अपेक्षाकृत कम खर्च में संभव है। यदि इस दिशा में तेजी से कदम नहीं उठाए गए, तो भारत एक बड़ा अवसर खो सकता है।

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