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बिहार के बेगूसराय में दारोगा का जिससे था जमीन का विवाद, झारखंड के खूंटी में झूठे केस में बना दिया अभियुक्त…

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झारखंड (JHARKHAND): खूंटी जिले में पुलिस विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सायको थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर रामसुधार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सरकारी हैसियत का इस्तेमाल निजी जमीन विवाद को निपटाने के लिए किया और एक निर्दोष व्यक्ति को गंभीर मामले में फँसाने का प्रयास किया। मामला सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय की कार्रवाई तेज हो गई है।

खूंटी एसपी मनीष टोप्पो ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दारोगा रामसुधार सिंह को निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। साथ ही, एनडीपीएस एक्ट से जुड़े जिस केस की जांच वे कर रहे थे, उससे उन्हें हटा दिया गया है और आगे की जिम्मेदारी दारोगा प्रभात रंजन पांडेय को सौंप दी गई है।


कैसे हुआ खुलासा?

सायको थाना में 20 फरवरी 2025 को एनडीपीएस एक्ट के तहत कांड संख्या 13/25 दर्ज हुआ था, जिसमें मुख्य आरोपी लाखा पाहन को गिरफ्तार किया गया था। केस की जांच संभाल रहे दारोगा रामसुधार सिंह ने लाखा पाहन के कथित बयान के आधार पर यह रिपोर्ट बनाई कि बेगूसराय निवासी अमरेंद्र कुमार ने जिलिंगकेला में अफीम की खेती के लिए लाखा पाहन को 25 हजार रुपये दिए थे।

हालाँकि, डीजीपी के निर्देश पर हुई विस्तृत जांच में यह दावा पूरी तरह मनगढ़ंत निकला।


जांच में सामने आए तथ्य

डीएसपी द्वारा तैयार रिपोर्ट में सामने आया कि—
अमरेंद्र कुमार कभी खूंटी क्षेत्र में गया ही नहीं था।
लाखा पाहन कभी बेगूसराय नहीं पहुँचा।
दोनों के बीच किसी प्रकार की फोन कॉल भी दर्ज नहीं हुई।

इसके बावजूद, रामसुधार सिंह ने वर्षों पुराने जमीन विवाद में अमरेंद्र को फँसाने के उद्देश्य से उसे बड़े केस में प्रमुख आरोपी के रूप में पेश कर दिया।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी सवाल उठ रहे हैं कि किसी निजी दुश्मनी में एक पुलिस पदाधिकारी इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा कैसे कर सकता है।

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