बॉलीवुड के ‘किंग ऑफ रोमांस’ कहे जाने वाले शाहरुख खान आज 02 नवंबर को अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। छोटे पर्दे से शुरुआत करने वाले शाहरुख ने धीरे-धीरे वह मुकाम हासिल किया, जहाँ आज वे हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली अभिनेताओं में गिने जाते हैं। धारावाहिकों से पहचान बनाने के बाद उन्होंने फिल्मों में कदम रखा और अपनी पहली रिलीज़ ‘दीवाना’ से ही दर्शकों का प्यार जीत लिया। तीन दशकों से अधिक समय से शाहरुख खान लगातार भारतीय सिनेमा के चमकते सितारों की पहली पंक्ति में शामिल हैं। जन्मदिन के अवसर पर चलिए जानते हैं उनके जीवन के कुछ रोचक अध्याय—
परिवारिक पृष्ठभूमि और शुरुआती जीवन
दिल्ली में 02 नवंबर 1965 को जन्मे शाहरुख खान का बचपन साधारण माहौल में बीता। उनके पिता ताज मोहम्मद खान और मां लतीफ़ फ़ातिमा खान ने उन्हें पढ़ाई और संस्कार दोनों दिए। शाहरुख खान आज भले करोड़ों दिलों पर राज करते हैं, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्होंने अपने खर्च चलाने के लिए कई छोटे-मोटे काम भी किए, जिनमें टिकट बेचने जैसा काम भी शामिल था। वे हमेशा बताते हैं कि उनके पिता उन्हें कश्मीर दिखाना चाहते थे, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई।
टीवी से एक्टिंग करियर की शुरुआत
अभिनय की दुनिया में शाहरुख की एंट्री टीवी से हुई। उन्हें सबसे पहले “दिल दरिया” नामक धारावाहिक में काम मिला, लेकिन शो में लगातार देरी होती रही। इसी बीच उन्हें “फौजी” में मुख्य भूमिका मिल गई, जिसके जरिए वह घर-घर पहचाने जाने लगे। दिलचस्प बात यह है कि शाहरुख का सपना भारतीय सेना में शामिल होने का था, लेकिन किस्मत उन्हें अभिनय की राह पर ले आई। “वागले की दुनिया”, “उम्मीद” और “महान कर्ज” जैसे अन्य कार्यक्रमों में भी उन्होंने छोटी-छोटी भूमिकाएँ निभाईं।
बॉलीवुड में सफर और सफलता
शाहरुख को पहली फिल्मी पहचान हेमा मालिनी की निर्देशित फिल्म “दिल आशना है” से मिली, मगर उनकी पहली रिलीज़ “दीवाना” रही, जिसने उन्हें बॉलीवुड में अपनी मजबूत जगह दिला दी। इसके बाद उन्होंने “राजू बन गया जेंटलमैन”, “माया मेमसाब”, “किंग अंकल”, “चमत्कार”, “बाज़ीगर” और “डर” जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएँ निभाकर यह साबित किया कि वह केवल रोमांटिक हीरो ही नहीं, बल्कि एक बहुमुखी कलाकार भी हैं। फिल्म “डर” में उनका मशहूर संवाद “आई लव यू क..क..किरण” आज भी लोगों की ज़ुबान पर है।
बड़ी सफलता और लोकप्रियता
1994 में आई फिल्म “कभी हां कभी ना” शाहरुख के करियर में एक अहम मोड़ थी। इस फिल्म के लिए उन्होंने स्वयं टिकट खिड़की पर खड़े होकर टिकट बेचे थे। इसके बाद 1995 में रिलीज़ हुई “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। यह फिल्म न केवल उनकी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है, बल्कि भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। इसके बाद शाहरुख 90 के दशक के आखिरी वर्षों तक युवाओं के चहेते और रोमांस के सबसे बड़े प्रतीक बन गए।