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वउठनी एकादशी व्रत को बताया जन्म-जन्मांतर के पुण्य का प्रतिफल: श्रीमद्भागवत कथा में बोलीं सुश्री ब्रज प्रिया किशोरी जी

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धनबाद (SINDRI): सिंदरी के शहरपुरा स्थित शिव मंदिर प्रांगण में जारी श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को देवउठनी एकादशी, नंदोत्सव और तुलसी विवाह का शुभ अवसर उत्साह व आध्यात्मिक भाव से मनाया गया। कथा व्यास सुश्री ब्रज प्रिया किशोरी जी ने इस पावन एकादशी के महत्व और इससे मिलने वाले पुण्य-प्रतिफल को विस्तार से समझाया।

उन्होंने बताया कि चतुर्मास में भगवान विष्णु चार महीने योगनिद्रा में रहते हैं और देवउठनी एकादशी को उनके जागरण के साथ संपूर्ण सृष्टि में हर्ष का वातावरण फैल जाता है। इस दिन शालीग्राम और तुलसी का विवाह, हवन एवं पूजन का विशेष विधान है, जिसे करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। सुश्री किशोरी जी ने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि देवी लक्ष्मी ने स्वयं भगवान नारायण से आग्रह किया था कि वे वर्षा ऋतु में चार माह विश्राम करें, जिसके बाद से यह परंपरा चलन में आई। इस व्रत को करने से सहस्त्र अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है तथा भक्त को मोक्ष और विष्णुलोक की प्राप्ति भी संभव होती है।

कथा के दौरान वामन अवतार की कथा का भी विस्तृत वर्णन किया गया। कथाव्यास ने कहा कि सद्कर्म में बाधा नहीं डालनी चाहिए, बल्कि अच्छे काम में सहयोग ही सच्ची धर्मपरायणता है। विरोचनपुत्र राजा बलि की कथा सुनाकर उन्होंने नंदोत्सव से पहले वामन अवतार की दिव्य लीला की झांकी भी प्रस्तुत कराई। “नंद के आनंद भयो…” जैसे भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं के बीच माखन, मिश्री, फल, मखाना एवं प्रसाद का वितरण किया गया।

कार्यक्रम के प्रमुख यजमान अमोद कुमार सिंह, उनकी धर्मपत्नी उषा देवी और सुपुत्र अखिलेश सिंह ने पूरे आयोजन में विशेष भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं ने उनके परिवार की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी दिव्य कथा का आयोजन करना अत्यंत सौभाग्य की बात है। सोमवार की कथा में अपेक्षा से कई गुना अधिक श्रद्धालु पहुँचे, जिसके कारण अखिलेश सिंह और रितेश पांडेय को अतिरिक्त बैठक व्यवस्था सुनिश्चित करनी पड़ी।

कार्यक्रम में अमोद कुमार सिंह, श्रीमती उषा सिंह, अखिलेश सिंह के अलावा प्रशांत कुमार दुबे, सोनू गिरी उर्फ विकास गिरी, दिनेश सिंह, रितेश पांडेय, ब्रजेश सिंह, सुरेंद्र सिंह, ए.के. राय, बनवाली झा, अर्चना सिंह, अंजना देवी, रंजना सिंह, वंदना, अनुराधा, दीपिका, योगिता, रानी देवी, रवि कुमार, राजीव कुमार, कमलेश, केशव, आदित्य, अक्षर, सुनील, सत्येंद्र पांडेय, हरिश्चंद्र दुबे, राजेश प्रसाद सहित सैकड़ों श्रद्धालु महिलाओं-पुरुषों ने भक्ति-भाव से कथा श्रवण किया।

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