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पश्चिम बंगाल में DGP नियुक्ति पर अड़चन, UPSC ने सुप्रीम कोर्ट जाने की दी सलाह

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कोलकाता (KOLKATA):
पश्चिम बंगाल में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वर्तमान डीजीपी राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है, लेकिन अब तक उनके स्थान पर नए डीजीपी के नाम को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। इसी बीच संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राज्य सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से मार्गदर्शन प्राप्त करने की सलाह दी है।

UPSC के निदेशक नंद किशोर कुमार ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखते हुए कहा है कि राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति लेना आवश्यक होगा। आयोग ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए आईपीएस अधिकारियों के पैनल को भी वापस कर दिया है, जिनमें से किसी एक को डीजीपी नियुक्त करने का प्रस्ताव था।

नियमानुसार, किसी भी राज्य को डीजीपी पद के लिए तीन वरिष्ठतम पात्र आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल UPSC को भेजना होता है, जिसके बाद आयोग उनमें से एक नाम को अंतिम रूप से मंजूरी देता है। हालांकि, पश्चिम बंगाल के मामले में यह निर्धारित प्रक्रिया तय समय-सीमा में पूरी नहीं की जा सकी।

इस स्थिति की शुरुआत दिसंबर 2023 में तत्कालीन डीजीपी मनोज मालवीय के सेवानिवृत्त होने के बाद हुई। उस समय राज्य सरकार को उनके स्थान पर नए डीजीपी के चयन के लिए पैनल भेजना था, लेकिन इसके बजाय राजीव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर दिया गया। बाद में भेजे गए पैनल को UPSC ने स्वीकार नहीं किया।

UPSC के पत्र में जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार किसी राज्य सरकार को मौजूदा डीजीपी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नए डीजीपी के लिए आईपीएस अधिकारियों का पैनल आयोग को भेजना अनिवार्य है। आयोग का कहना है कि इस नियम के तहत बंगाल सरकार को सितंबर 2023 तक पैनल भेज देना चाहिए था।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विषय पर भारत के अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय ली गई थी, जिन्होंने भी यही मत व्यक्त किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में राज्य सरकार को डीजीपी नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेनी चाहिए।

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